स्वचालित कैरियोटाइपिंग Back

पुनरावर्ती गर्भपात, पुरूष नपुंसकता एवं महिला बांझपन, मानसिक विकास में कमी एवं अन्य विविध सिन्ड्रोमिक एवं नॉन-सिन्ड्रोमिक मामलों के कारणों का गुणसूत्रीय स्तर पर आनुवंशिक निदान करने के लिए सीसीएमबी में कैरियोटाइपिंग सुविधा की स्थापना की गयी है । यह सुविधा कैरियोटाइपिंग हेतु विविध उपकरण एवं साफ्टवेयर से सुसज्जित है ।

खून (लिंफोसाइट संवर्धन) - अधिकांश रूप से सामान्यत: इस विधि का प्रयोग किया जाता है, एम्नियोटिक द्रव- जन्मपूर्व निदान से प्राप्त विविध नमूनों को प्रयोग में लाते हुए गुणसूत्रीय परीक्षण किया जाता है । गुणसूत्रीय दोषों का पता लगाने के लिए पीओसी (गर्भपात भ्रूणीय ऊतक) भी एक कल्चर है ।

जीटीजी बैंडिंग एक आमतौर पर प्रयोग होने वाली तकनीक है, होल क्रोमोजोम पेंट्स (WCP), लोकस स्पेसिफिक आईडेंटीफायर (एलएसआई) एवं मल्टीकलर फ्लुओरेसेंस प्रोब्स (एम-फिश) जैसी विविध जाँच तकनीकों को इस्तेमाल में लाने द्वारा फ्लुओरेसेंस इन सिटु हाईब्रिडाईजेशन (फिश) जैसी उन्नत तकनीकों को भी इसमें उपयोग में लाया जाता है जिससे संबंधित दोष को पकड़ा जा सके एवं ब्रेक प्वाइंट का लक्षणांकन किया जा सके ।


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