1. वन्यजीवों की उनके अवयव, अवशेष या मल-मूत्र आदि से पहचान करने के लिए सार्वभौमिक डीएनए आधारित मार्कर को विकसित किया है ।
  2. तस्करी किए गए स्टॉर कछुओं को आणविक मार्करों के आधार पर अध्ययन करते हुए उनके सहज स्थानों में उन्हें पुन:स्थापित करना ।
  3. तेदुओं तथा खुरदार प्राणियों की प्रजनन क्षमता तथा उनकी गर्भधारण की स्थिति को जानने के लिए बिना चीर-फाड़ वाली तकनीकों का विकास ।
  4. भारत के विविध चिड़ियाघरों के तथा अभ्‍यारण्यों के कुछ लुप्तप्राय जानवरों में डीएनए आधारित पद्धतियों का उपयोग करते हुए परजीवी, जीवाण्विक तथा विषाणुजनित रोगों की पहचान करना ।
  5. शेर, बाघ तथा चीता के विषम युग्मजता को मापने तथा चिड़ियाघर के प्रबंधकारों को उनके अंत:प्रजनन के बारे में सलाह देने के लिए प्रजाति-विशेष माइक्रोसेटलाइट मार्करों को विकसित करना ।
  6. भारत के 250 से अधिक स्तनपायी, पक्षी तथा सरीसृत प्रजातियों के डीएनए को बैंक के रूप में संरक्षित करना ।
  7. लुप्तप्राय प्रजातियों से प्राप्त जनन ग्रंथियों को निम्नताप परीक्षण करना और उन्हें प्रभावी रूप से प्रकार्यात्मक युग्मकों के उत्पादन के लिए पुन:जीर्वित करना ।
  8. कृत्रिम बीजारोपण की मदद से एक चीतल हिरण के बच्चे ‘स्पॉटी’ को तथा एक काले हिरण के बच्चे ‘ब्लैकी’ को जन्म दिया गया है ।
  9. मृत जानवरों से युग्मजों को प्राप्त करने तथा उनके निम्नताप पर परीक्षण के लिए प्रोटोकाल को विकसित करना ताकि इनविट्रो निषेचन की मदद से उनसे भ्रूण प्राप्त किया जा सके ।
  10. गैर-चीरफाड़ वाली पद्धतियों के उपयोग करने द्वारा बाघों की संख्या जानने, उनके लिंग पहचान तथा उनकी संख्या की संरचना को प्रलेखित करना ।