कारगर संरक्षण उपायों में वन्यप्राणियों को उनके अपने स्वस्थल में संरक्षित करना और प्रजातियों को उनके बंदीगृह में नियंत्रित परिस्थितियों के अंतर्गत पुन:रोपण द्वारा उनकी संख्या में वृद्धि करना सम्मिलित है । इन्हीं दो उपायों को जैवप्रौद्योगिकी उपकरणों के सृजनात्मक रूप से प्रयोग करने के लिए लैकॉन्स की स्थापना की गयी है । भारत सरकार के जैवप्रौद्योगिकी विभाग (DBT), नई दिल्ली एवं भारतीय केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA), नई दिल्ली तथा वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR), नई दिल्ली एवं तत्कालीन आंध्रप्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से लैकॉन्स (LaCONES) परियोजना को वर्ष 1998 में आरंभ किया गया था । इस प्रयोगशाला को वर्ष 2007 में स्थापित किया गया । भारत में संरक्षण जैव प्रौद्योगिकी की उत्कृष्टता को बढ़ावा देने तथा लुप्तप्राय वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए अपनी सेवा प्रदान करने के लिए यह प्रयोगशाला उद्यमित है ।