वन्यजीव आपराधिक मामले एवं रोग निदान : अवैध औषधि तथा हथियारों के व्यापार के बाद वन्यजीव तथा उनके उत्पादों के अवैध व्यापार को तीसरा दर्जा प्राप्त है । वन्यजीवों का अवैध व्यापार काफी फायदेमंद है और इसमें कम जोखिम और अधिक प्रतिफल की संभावना है । दुनियाभर में, वन्यजीव उत्पादों के लिए काफी मांग है, जैसे बाघ के अंग चीनी पारम्परिक औषधियों में, पक्षियों के पंखों को आलंकारिक आभूषणों में तथा गैंडे के सींग को संपत्ति के प्रतीक के रूप में उपयोग में लाया जाता है । इसकी प्रतिक्रिया के रूप में, वर्ष, 1973 में स्थापित लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन (CITES) ने लुप्तप्राय वन्यप्राणियों के अंगों तथा अन्य उत्पादों के अवैध व्यापार पर रोक लगाया । लेकिन, कानून के अनुपालन तथा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में निर्धारित मानकों का पालन कराना अब भी एक बड़ी चुनौती बनकर रह जाती है ।
अवैध रूप से हो रहे वन्यप्राणी व्यापार पर निगरानी के लिए जाँच स्थलों पर प्रमुख रूप से प्रजातियों की तथा जानवर विशेष के लिंग निर्धारण की पहचान आवश्यकता है अपराधियों पर सफलतापूर्वक अभियोग चलाने के लिए मात्र आकारकीय व्याख्या विश्वसनीय नहीं माना जाता है । इस प्रकार के मामलों में आणविक पद्धतियाँ काफी उपयोगी साबित होती हैं । डीएनए को अत्याधिक रूप से संसाधित तथा सड़े हुए वन्यप्राणियों के उत्पादों, जैसे – पकाया गया तथा सूखे मांस, सूखे चमड़े पर खरोच, शार्क मछली के सुखाए गए पंख, अंडों के छिलके, जानवरों के बाल, हड्डियाँ, हाथी दाँत, सींग, कछुवे का कवच, पक्षियों के पंख, मछलियों के स्केल आदि से प्राप्त किया जा सकता है और तो और, जिस थैली में अवैध वन्यप्राणी के उत्पादनों को रखने के लिए उपयोग में लाया गया है, उससे भी डीएनए को प्राप्त किया जा सकता है । इस तरह के अवैध वन्यप्राणियों के व्यापार में प्रजातियों की निर्दिष्ट रूप से पहचान करने में अपनी रिपोर्ट देने द्वारा लैकॉन्स कानून प्रवर्तन प्राधिकरणों की मदद कर रहा है ।
इसी तरह, वन्यप्राणियों में होने वाली बीमारियाँ खतरा बनी हुई हैं । इन बीमारियों की आरंभिक पहचान कर पाने से इन्हें अन्य वन्यप्राणियों तक पहुँचने से नियंत्रित किया जा सकता है और संभावित जानवरों मृत्युओं को रोका जा सकता है । डीएनए आधारित तकनीकों के प्रयोग करने द्वारा लैकॉन्स वन्यप्राणियों में बीमारियों की पहचान करने की सेवा उपलब्ध करती है ।
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